(उत्तम, मध्यम तथा अधम भेद से) तीन प्रकार के तथा (मन, वचन तथा शरीर आश्रित होने से) तीन अधिष्ठान वाले दश लक्षणों (१२।५-७) से युक्त देही (जीव) के मन को (कर्म में) प्रवृत्त करने वाला जाना।
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