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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 39
येन यांस्तु गुणेनैषां संसारान्प्रतिपद्यते । तान्समासेन वक्ष्यामि सर्वस्यास्य यथाक्रमम्‌ ।।
(भृगु मुनि महर्षियों से कहते हैं कि) इन तीनों गुणों में से जो मनुष्य जिस गुण के द्वारा जिन संसारों अर्थात्‌ गतियों को प्राप्त करता है, उन सबको संक्षेप से इस संसार के क्रम से कहूँगा।
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