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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 35
यत्कर्म कृत्वा कुर्वश्च करिष्यंश्चैव लज्जति । तज्ज्ञेयं विदुषा सर्व तामसं गुणलक्षणम्‌ ।।
मनुष्य जिस काम को करके, करता हुआ तथा भविष्य में करने वाला होकर लज्जित होता है; अन सबको विद्वान्‌ "तामस गुण” का लक्षण समझें।
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