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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 32
आरम्भरुचिताऽ धैर्यमसत्कार्यपरिग्रहः । विषयोपसेवा चाजस्त्र राजसं गुणलक्षणम्‌ ।।
(फलतप्राप्त्यर्थ आरम्भ किये गये काम में रुचि होना, धैर्य का अभाव, शास्त्रवर्जित कर्म का आचरण तथा सर्वदा (रूप, रस, शब्द आदि) विषयों में आसक्ति ये राजसिक गुण' के लक्षण हैं।
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