(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि) इन (१२।२४) तीनों गुणों का (क्रमशः) उत्तम, मध्यम और जघन्य (तुच्छ) जो फलोदय है, उसे अशेषतः (सम्पूर्ण रूप से, मैं) कहुँगा।
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