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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 3
शुभाशुभफलं कर्म मनोवाग्देहसम्भवम्‌ । कर्मजा गतयो नृणामुत्तमाधममध्यमाः ।।
मनुष्यों के कायिक, वाचिक तथा मानसिक कर्म शुभाशुभ फल देने वाले होते हैं और उनसे उत्पन्न होने वाली मनुष्यों की उत्तम (देव), मध्यम (मनुष्य आदि) तथा अभ्रधम (तिर्यक्‌ आदि) गतियाँ (जन्म) भी होती हैं।
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