जो मोहयुक्त (सत्-असत् अर्थात् भले-बुरे विचार से शून्य) हों, जिसके विषय का आकार स्पष्ट हो तथा जो तर्क से शून्य एवं (अन्तःकरण और बहिष्करण द्वारा) दुजञेय हों; उसे 'तमोगुण' समझना चाहिये।
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