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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 21
यदि तु प्रायशोऽधर्मं सेवते धर्ममल्पशः । तैर्भूतैः स परित्यक्तो यामीः प्राप्नोति यातनाः ।।
यदि प्राणी मनुष्य-शरीर में अधिक पाप तथा थोड़ा पुण्य करता है तो (मनुष्य-शरीर से परिणत) उन्हीं पञ्चभूतों (पृथ्वी आदि) से त्यक्त होकर अर्थात्‌ मरकर यमयातनाओं को भोगता है।
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