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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 2
स तानुवाच धर्मात्मा महर्षीन्मानवो भृगुः । अस्य सर्वस्य शृणुत कर्मयोगस्य निर्णयम्‌ ।।
धर्मात्मा मनुपुत्र भृगुजी ने उन (महर्षियों) से कहा कि इन सब कर्म सम्बन्ध के निर्णय को (आप लोग) सुनिये।
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