वे शरीर विषय-संसर्ग से उत्पन्न प्रमुख फलों को भोगकर निष्पाप हो महा-बलवान् उन्हीं दोनों (महान् तथा परमात्मा) का आश्रय करते हैं । (उसमें लीन होते हैं)।
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