उस (परमात्मा) के शरीर से असङ्कय जीव उत्पन्न (अग्नि से चिनगारी के समान प्रकट) होते हैं, जो छोटे-बड़े प्राणियों को कर्मों में प्रवृत्त करते रहते हैं।
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