पञ्च महाभूत (पृथ्वी, जल, वायु, जेज और आकाश) से मिले हुए वे दोनों महान् तथा क्षेत्रज्ञ - छोटे-बड़े सब भूतात्माओं में स्थित उस परमात्मा में व्याप्त होकर रहते हैं।
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