जीवसंज्ञोऽन्तरात्माऽ न्यः सहजः सर्वदेहिनाम् ।
येन वेदयते सर्व सुखं दुःखं च जन्मसु ।।
सब प्राणियों का सहज (एक साथ में उत्पन्न) 'जीव' नाम का दूसरा ही आत्मा अर्थात् 'जीवात्मा' है, जो प्रतिजन्म में सब सुख-दु:ख का अनुभव करता है।
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