एवं यः सर्वभूतेषु पश्यत्यात्मानमात्मना ।
स सर्वसमतामेत्य ब्रह्माभ्येति परं पदम् ।।
इस प्रकार (१२।११८-१२४) सम्पूर्ण जीवों में स्थित आत्मा (परमात्मा) को आत्मा के द्वारा जो देखता है, वह सब में समानता प्राप्त कर ब्रह्मरूप परमपद (मोक्ष) को प्राप्त करता है।
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