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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 123
एतमेके वदन्त्यग्निं मनुमन्ये प्रजापतिम्‌ । इन्द्रमेके परे प्राणमपरे ब्रह्म शाश्वतम्‌ ।।
इस (परम पुरुष परमात्मा) को कुछ लोग (याज्ञिक-अध्वर्यु) अग्नि, कुछ लोक (सृष्टिकर्ता) प्रजापति मनु, कुछ लोग (ऐश्वर्यसम्पन्न होने से) इन्द्र, कुछ लोग प्राण तथा कुछ लोग शाश्वत (सनातन अर्थात्‌ नित्य) ब्रह्म कहते हैं।
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