मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 121
मनसीन्दुं दिशः श्रोत्रे क्रान्ते विष्णुं बले हरम्‌ । वाच्यग्निं मित्रमुत्सर्गे प्रजने च प्रजापतिम्‌ ।।
मन में चन्द्रमा को, कानों में दिशाओं को, चरणों में विष्णु को, बल (सामर्थ्य) में शिव को, वचन में अग्नि को, गुदा में मित्र को, शिश्न में प्रजापति को लीन (हुआ समझकर) एकत्व की भावना करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें