मन में चन्द्रमा को, कानों में दिशाओं को, चरणों में विष्णु को, बल (सामर्थ्य) में शिव को, वचन में अग्नि को, गुदा में मित्र को, शिश्न में प्रजापति को लीन (हुआ समझकर) एकत्व की भावना करे।
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