(इन्द्र आदि) सब देवता आत्मा अर्थात् परमात्मा ही है, सब संसार आत्मा में ही अवस्थित है और आत्मा ही इन देहियों (जीवों) के कर्मसम्बन्ध को उत्पन्न करता है।
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