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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 119
आत्मैव देवताः सर्वाः सर्वमात्मन्यवस्थितम्‌ । आत्मा हि जनयत्येषां कर्मयोगं शरीरिणाम्‌ ।।
(इन्द्र आदि) सब देवता आत्मा अर्थात्‌ परमात्मा ही है, सब संसार आत्मा में ही अवस्थित है और आत्मा ही इन देहियों (जीवों) के कर्मसम्बन्ध को उत्पन्न करता है।
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