मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 114
अव्रतानाममन्त्राणां जातिमात्रोपजीविनाम्‌ । सहस्रशः समेतानां परिषत्त्वं न विद्यते ।।
(सावित्री ब्रह्मचर्यादि) व्रतो से हीन, मन्त्र (वेदाध्ययन से) रहित और जातिमात्र से ब्राह्मण कहलाकर जीने वाले एकत्रित सहस्रों ब्राह्मणों की भी परिषद्‌ (सभा, धर्मनिर्णायक) नहीं होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें