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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 112
ऋगवेदविद्यजुर्विच्च सामवेदविदेव च । त्र्यवरा परिषज्ज्ञेया धर्मसंशयनिर्णये ।।
ऋग्वेद, यजुर्वेद तथा सामवेद को पढ़ने और उसके तत्त्व को जानने वाले कम से कम तीन ब्राह्मणों की सभा धर्म-सम्बन्धी सन्देह के निश्चय करने में समर्थ होती है।
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