जब मनुष्य काम तथा क्रोध को रोककर सब जीवों में इस त्रिदण्ड (कायिक, वाचिक तथा मानसिक दण्ड) को व्यवहत करता है, तब सिद्धि (मुक्ति) को प्राप्त करता है।
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