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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 109
धर्मेणाधिगतो यैस्तु वेदः सपरिबृंहणः । ते शिष्टा ब्राह्मणा ज्ञेयाः श्रुतिप्रत्यक्षहेतवः ।।
धर्म से (ब्रह्मचर्यादि आश्रम में निवासकर, व्याकरण-मीमांसादि शास्त्र से) परिस्फुट वेद को जिन्होंने पढ़ा है, वेद (के तत्त्व) को प्रत्यक्ष करनेवाले उन ब्राह्मणों को 'शिष्ट' जानना चाहिए।
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