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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 106
आर्ष धर्मोपदेशं च वेदशास्त्राविरोधिना । यस्तर्केणानुसंधत्ते स धर्म वेद नेतरः ।।
जो मनुष्य ऋषिदृष्ट वेद तथा तन्मूलक स्मृति शास्त्रों को वेदानुकूल तर्क से विचारता है, वही धर्मज्ञ है, दूसरा नहीं।
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