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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 103
अज्ञेभ्यो ग्रन्थिनः श्रेष्ठा ग्रन्थिभ्यो धारिणो वराः । धारिभ्यो ज्ञानिनः श्रेष्ठा ज्ञानिभ्यो व्यवसायिनः ।।
आज्ञों (कुछ अंश पढ़े हुए) से सम्पूर्ण ग्रन्थ पढ़े हुए लोग श्रेष्ठ हैं, उन (सम्पूर्ण ग्रन्थ को पढ़े हुए लोगों) से उस सम्पूर्ण ग्रन्थ को धारण करने वाले श्रेष्ठ हैं, उन (सम्पूर्ण ग्रन्थ धारण करने वालों) से ज्ञानी (पढ़े हुए सम्पूर्ण ग्रन्थ के अर्थ को जानने वाले) श्रेष्ठ हैं और उन (ज्ञानियों) से व्यवसायी (वेद-विहित कर्मो का आचरण करने वाला) श्रेष्ठ हैं।
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