(महर्षियों ने भृगुजी से पूछा कि) हे निष्कल्मष भृगुजी! (आपने अवान्तर भेदों के सहित) चारों वर्णो के समस्त धर्म को कहा, (अब जन्मान्तर के शुभाशुभ) कर्मो के परमार्थ रूप से फल की प्राप्ति को हम लोगों से आप कहिये।
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