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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 99
गृहीत्वा मुसलं राजा सकृद्धन्यात्तु तं स्वयम्‌ । वधेन शुध्यति स्तेनो ब्राह्मणस्तपसैव तु ।।
तब राजा को चाहिए कि [पूर्व (८।१३५) वचन के अनुसार उक्त चोर जिस मुसल को कन्धे पर रखकर लाया है, उस] मुसल को लेकर उससे चोर को स्वयं मारे, उसे मारने (या मारने के कारण मृततुल्य होने) से (वह चोर) शुद्ध (पापहीन) हो जाता है और ब्राह्मण आगे (११।९९) कही हुई तपस्या से ही शुद्ध हो जाता है।
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