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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 95
अमेध्ये वा पतेन्मत्तो वैदिकं वाप्युदाहरेत्‌ । अकार्यमन्यत्कुर्याद्वा ब्राह्मणो मदमोहितः ।।
(क्योंकि मद्यपान से मतवाला) ब्राह्मण अपवित्र (मल-मूत्रादि से अशुद्ध नाली आदि) में गिरेगा, वेदवाक्य का उच्चारण करेगा और निषिद्ध कर्म (अहिंस्य-हिंसा आदि) करेगा (अतएव उसे मद्यपान नहीं करना चाहिये)।
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