अमेध्ये वा पतेन्मत्तो वैदिकं वाप्युदाहरेत् ।
अकार्यमन्यत्कुर्याद्वा ब्राह्मणो मदमोहितः ।।
(क्योंकि मद्यपान से मतवाला) ब्राह्मण अपवित्र (मल-मूत्रादि से अशुद्ध नाली आदि) में गिरेगा, वेदवाक्य का उच्चारण करेगा और निषिद्ध कर्म (अहिंस्य-हिंसा आदि) करेगा (अतएव उसे मद्यपान नहीं करना चाहिये)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।