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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 94
यक्षरक्षःपिशाचान्नं मद्यं मांसं सुरासवम्‌ । तद्‌ब्राह्मणेन नात्तव्यं देवानामश्रता हविः ।।
मद्य, मांस, सुरा और आसव ये चारों यक्ष, राक्षसों तथा पिशाचों के अन्न (भक्ष्य पदार्थ) हैं, अतएव देवताओं के हविष्य खाने वाले ब्राह्मणों को उनका भोजन (पान) नहीं करना चाहिये।
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