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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 87
उक्त्वा चैवानृतं साक्ष्ये प्रतिरभ्य गुरु तथा । अपहृत्य च निःक्षेपं कृत्वा च स्त्रीसुहृद्र्धम्‌ ।।
सुवर्ण या भूमि आदि की गवाही में असत्य बोलने पर, गुरुतर मिथ्या दोष लगाने पर, धरोहर का अपहरण करने पर तथा (अग्निहोत्री ब्राह्मण की) स्त्री और मित्र की हत्या करने पर (ब्रह्महत्या के समान प्रायश्चित्त करे)।
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