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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 82
धर्मस्य ब्राह्मणो मूलमग्रं राजन्य उच्यते । तस्मात्समागमे तेषामेनो विख्याप्य शुध्यति ।।
क्योंकि ब्राह्मण को धर्म का मूल तथा क्षत्रिय को धर्म का अग्रभाग (मनु आदि महर्षियों ने) कहा है, इस कारण (वह ब्रह्मघाती पुरुष) उनके एकत्रित होने पर अपने पाप को निवेदन कर (अवभृथ स्नान करने से) शुद्ध हो जाता है।
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