एवं दृढव्रतो नित्यं ब्रह्मचारी समाहितः ।
समाप्ते द्वादशे वर्षे ब्रह्महत्यां व्यपोहति ।।
इस प्रकार (११।७१-७९) सर्वदा नियमयुक्त ब्रह्मचर्य धारण किया हुआ, सावधान चित्तवाला (ब्रह्मघाती मनुष्य) बारह (और क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र क्रमशः २४, ३६, ४८) वर्ष पर ब्रह्महत्या से छूट जाता है।
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