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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 76
हविष्यभुग्वाऽ नुसरेत्‌ प्रतिस्रोतः सरस्वतीम्‌ । जपेद्वा नियताहारस्त्रिवैं वेदस्य संहिताम्‌ ।।
अथवा (नीवार तीनी आदि) हविष्यान्न को खाता हुआ प्रसिद्ध सोते से लेकर (पश्चिम) समुद्र तक (जहाँ तक सरस्वती नदी बहती है वहाँ तक) जावे, अथवा नियमित (अत्यन्त थोड़ा) भोजन करता हुआ वेद की संहिता को तीन बार जपे।
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