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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 75
सर्वस्वं वेदविदुषे ब्राह्मणायोपपादयेत्‌ । धनं हि जीवनायालं गृहं वास: परिच्छदम्‌ ।।
अथवा वेदज्ञाता ब्राह्मण के लिए सर्वस्व (समस्त सम्पत्ति) को दे देवे, या उसके जीवनपर्यन्त खाने-पहनने के लिए या सब सामग्रियों के सहित घर को देवे।
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