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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 73
यजेत वाऽश्वमेधेन स्वर्जिता गोसवेन वा। अभिजिद्विश्वजिद्भ्यां वा त्रिवृताम्निष्टुताऽपि वा ।।
अथवा अश्वमेध यज्ञ करे, तथा स्वर्जित, गोमेध, अभिजित्‌, विश्वजित्‌, त्रिवृत्‌ और अग्निष्टुत्‌; इनमें से कोई एक यज्ञ (अज्ञान से!) ब्रह्महत्या करनेवाला द्वजाति (१०।४) करे।
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