लक्ष्यं शस्त्रभृतां वा स्याद्विदुषामिच्छयात्मनः ।
प्रास्येदात्मानमग्नौ वा समिद्धे त्रिरवाकूशिराः ।।
“यह ब्रह्मघाती है" यह जानने वाले शस्त्रधारियों के (बाण का) स्वेच्छा से (मरने या मरने के समान होने तक) निशाना बने या जलती हुई अग्नि में नीचे शिर करके तीन बार अपने को डाले (जिससे मर जावे)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।