ब्राह्मण का वध करने वाला मनुष्य अपने पाप की शुद्धि (निवृत्ति) के लिये कुटिया बनाकर उस (मृत-ब्राह्मण के साथ नहीं मिलने पर दूसरे किसी) के शिर को चिह्न स्वरूप लेकर भिक्षान्न के भोजन को करता हुआ (अग्रिम (१ १।७७) वचन के अनुसार मुण्डित मस्तक होकर) बारह वर्षो तक वन में निवास करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।