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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 70
एतान्येनांसि सर्वाणि यथोक्तानि पृथकपृथक्‌ । यैयँब्रतैरपोह्यन्ते तानि सम्यङ्निबोधत ।।
(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि) ये सब (११।५३-६९) पृथक्‌-पृथक्‌ कहे गये पाप जिन-जिन व्रतों (प्रायश्चित) से नष्ट होते हैं, उन्हें (आप लोग मुझसे) अच्छी तरह सुनें।
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