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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 69
कृमिकीटवयोहत्या मद्यानुगतभोजनम्‌ । फलैधः कुसुमस्तेयमधैर्यं च मलावहम्‌ ।।
कृमि (अत्यन्त छोटे कीड़े), कीट (कृमि से कुछ बड़े कीड़े) तथा पक्षियों का वध करना, मद्य के साथ (एक पात्र में) लाये गये पदार्थ का भोजन; फल, ककड़ी तथा फल को चुराना और (साधारण अनिष्ट-कारक कष्टादि में भी) अधीरता ये (प्रत्येक कर्म) मनुष्य को मलिन करने वाले हैं।
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