मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 65
धान्यकुप्यपशुस्तेयमद्यपस्त्रीनिषेवणम्‌ । स्त्रीशूद्रविट्क्षत्रवधो नास्तिक्यं चोपपातकम्‌ ।।
धान्य, सुवर्ण आदि धातु तथा पशुओं की चोरी करना, मद्यपान करनेवाली द्विज-स्त्री के साथ सम्भोग करना, स्त्री, शूद्र, वैश्य तथा क्षत्रिय का वध करना और नास्तिकता - ये (१-१ भी) उपपातक हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें