अनाहिताग्मिता स्तेयमृणानामनपक्रिया ।
असच्छास्त्राधिगमनं कौशीलव्यस्य च क्रिया ।।
(शास्त्रानुसार) अधिकार होने पर भी यज्ञ नहीं करना, चोरी करना, ऋण नहीं चुकानां, निन्दित शाख्रों को पढ़ना और कुशीलव का (नाचना, गाना, बजाना आदि) कर्म करना।
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