इन्धनार्थमशुष्काणां द्रुमाणामवपातनम् ।
आत्मार्थ च क्रियारम्भो निन्दितान्नादनं तथा ।।
इंधन के लिए हरे पेड़ों को (काट या कटवाकर) गिराना, (स्वस्थ रहते हुए) अपने लिए (देवता या पितरों के उद्देश्य से नहीं) क्रियारम्भ (पाक क्रियादि) करना और निन्दित (५।५-२०, त्यज्य लहसुन आदि) पदार्थ को इच्छापूर्वक खाना।
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