कन्याया दूषणं चैव वार्धुष्यं व्रतलोपनम् ।
तडागारामदाराणामपत्यस्य च विक्रयः ।।
कन्यादूषण (कन्या की योनि में अङ्गुल्यादि डालकर कन्या को क्षतयोनि करना) सूद लेना, व्रत (ब्रह्मचर्यं आदि) को (मैथुनकर्मादि से) नष्ट करना, तडाग, उद्यान (बगीचा, फुलवाड़ी आदि) स्त्री और सन्तान को बेचना।
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