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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 6
यस्य त्रैवार्षिकं भक्तं पर्याप्तं भृत्यवृत्तये । अधिकं वाऽपि विद्येत स सोमं पातुमर्हति ।।
जिसके पास अपने परिवार तथा भूत्यों के तीन वर्ष तक या इससे भी अधिक समय तक पालन-पोषण के लिए अन्न हो, वह मनुष्य काम्य सोमयज्ञ करने के योग्य (अधिकारी) होता है।
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