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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 57
रेतःसेकः स्वयोनीषु कुमारीष्वन्त्यजासु च । सख्युः पुत्रस्य च स्त्रीषु गुरुतल्पसमं विदुः ।।
स्वयोनि (सहोदर बहन), कुमारी, चाण्डाली, मित्र तथा पुत्र की स्त्री में वीर्यपात अर्थात्‌ उसके साथ सम्भोग करना, ये गुरु (२1१४२) की पत्नी के साथ सम्भोग करने के समान है।
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