निक्षेपस्यापहरणं नराश्वरजतस्य च ।
भूमिवज्रमणीनां च रुक्मस्तेयसमं स्मृतम् ।।
ब्राह्मण के सुवर्ण के अतिरिक्त धरोहर को हड़पने वाला और मनुष्य (दासदासी), घोड़ा, चाँदी, भूमि, हीरा, मणि चुराने वाला सुवर्ण चुराने समान है।
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