अनृतं च समुत्कर्षे राजगामि च पैशुनम् ।
गुरोश्चालीकनिर्बन्धः समानि ब्रह्महत्यया ।।
जातिश्रेष्ठता के लिए असत्य-भाषण, राजा से (दूसरे के मृत्युकारक) चुगलखोरी, गुरु से असत्य कहना - ये ब्रह्महत्या के समान हैं।
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