एवं कर्मविशेषेण जायन्ते सद्विगर्हिताः ।
जडमूकान्धबधिरा विकृताकृतयस्तथा ।।
इस प्रकार कर्मविशेष से सज्जनों से निन्दित जड़; गुंगे, अन्धे, बहरे और कुरूप उत्पन्न होते हैं।
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