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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 40
अग्रिहोत्र्यपविध्याग्रीन्ब्राद्मणः कामकारतः । चान्द्रायणं चरेन्मासं वीरहत्यासमं हि तत्‌ ।।
जो अग्निहोत्री ब्राह्मण इच्छापूर्वक प्रातःकाल तथा सायंकाल अग्निहोत्र नहीं करे, उसे एक मास चान्द्रायण व्रत (११।२१५) करना चाहिये; क्योंकि अग्निहोत्र का त्याग वीरहत्या (पुत्रहत्या) के समान है।
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