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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 39
इन्द्रियाणि यशः स्वर्गमायुः कीर्ति प्रजाः पशून्‌ । हन्त्यल्पदक्षिणो यज्ञस्तस्मान्नाल्पधनो यजेत्‌ ।।
शास्त्रोक्त विधान से कम दक्षिणा देकर किया गया यज्ञ इन्द्रिय, यज्ञ, आयु, कीर्ति, प्रजा और पशु, इन सबों को नष्ट कर देता है, इस कारण से थोड़े धन वाले को यज्ञ नहीं करना चाहिये।
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