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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 37
प्राजापत्यमदत्वाऽ श्रमग्न्याधेयस्य दक्षिणाम्‌ । अनाहिताम्निर्भवति ब्राह्मणो विभवे सति ।।
सम्पत्ति रहने पर भी जो द्विज अग्न्याधान के समय प्रजापति देवता को (प्रजापति हैं देवता जिसके ऐसा) घोड़ा दक्षिणा में न देकर अग्निहोत्र ग्रहण करता है, उसे अग्निहोत्र का फल नहीं मिलता (इन कारण सामर्थ्य रहने पर अग्न्याधान करते समय घोड़े को दक्षिणा में अवश्य देना चाहिये)।
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