मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 36
नरके हि पतन्त्येते जुह्ृतः स च यस्य तत्‌ । तस्माद्वैतानकुशलो होता स्याद्वेदपारगः ।।
हवन करते हुए ये लोग (११।३५) तथा जिसकी तरफ से हवन करते हैं वे नरंक में पड़ते हैं, अतएव वैदिक कर्म में प्रवीण तथा वेद के परागामी को ही हवनकर्त्ता बनाना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें