नरके हि पतन्त्येते जुह्ृतः स च यस्य तत् ।
तस्माद्वैतानकुशलो होता स्याद्वेदपारगः ।।
हवन करते हुए ये लोग (११।३५) तथा जिसकी तरफ से हवन करते हैं वे नरंक में पड़ते हैं, अतएव वैदिक कर्म में प्रवीण तथा वेद के परागामी को ही हवनकर्त्ता बनाना चाहिये।
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